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हार्दिक बधाई और उज्जवल भविष्य कि शुभकामनाऐ
हार्दिक बधाई और उज्जवल भविष्य कि शुभकामनाऐ
शिक्षा ही समाज में विकास की धुरी : पटेल
आंजणा समाज का प्रतिभा सम्मान समारोह, 28 प्रतिभाओं को किया गया सम्मानित
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जय राजेश्वर .....
परम पुजन्य, प्रात स्मरणीय परम गुरुदेव संत श्री श्री 1008 श्री राजारामजी महाराज के आशीर्वाद से आँजना समाज निरंतर सफलता की और अगर्सित हो रहा है। मुझे खुशी है की हमारे समाज बन्धु पुरे भारतवर्ष में अपने अपने व्यवसाय को दिन दुगनी रात चौगुनी तरक्की कर रहा है।
जैसा की आप जानते हे आँजना समाज के बन्धु देश के कोने-कोने में अपने व्यवसाय के सिलसिले मै निवास करते है, वही स्थायी रूप से भी आँजना समाज विशेष रूप से 3 राज्यों में निवास करते है राजस्थान,गुजरात और मध्यप्रदेश।
हमारे आँजना समाज में प्रतिदिन कोई न कोई कार्यक्रम होता रहता है, उन कार्यक्रमो की काफी हद तक हमें समाचार, हमारे समाज की मासिक पत्रिकाओ से मिलता है, में सादुवाद देता हूँ, उन मासिक पत्रिका के संपादक को जो अपनी कड़ी मेहनत और लगन से हम तक अपनी पत्रिका में उन समाचारों को पहुचाते है। फिर भी कुछ समाचारों तक हमारे संपादक महोदय नही पहुच पाते है।
वो काम अब हमें पूरा करना है हमें हमारे आस पास होने वाले उन सभी समाचारों को एक ब्लॉग पर डालकर समाज को Hightlight करना है, उसके लिए आँजना समाज के युवाओ को आगे आना होगा। और आँजना समाज के लिए अपनी कलम की धार को तलवार की धार से भी ज्यादा तेज करना होगा।
हमारा ब्लॉग आँजना समाज http://
आप भी आँजना समाज के रिपोर्टर बन सकते है, आप को अपनी E- Mail ID रजिस्ट्रेशन करना होगा।
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पुन: आपका आभार जय श्री राजेश्वर
संत श्री सुजा राम जी की 2nd पुण्य तिथि मनाई
संत श्री सुजा राम जी की 2nd पुण्य तिथि मनाई
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-: श्री सुजाराम जी महाराज की 2 पुण्यतिथि मनाई :-
रायपुर,
संत श्री सुजाराम जी महाराज की 2 पुण्यतिथि आँजना चौधरी (पटेल) समाज के कार्यालय 60, गुलमोहर पार्क, लक्ष्मननगर,के प्रांगण मनाई गई
कार्यक्रम के दोरान संत श्री सुजाराम जी महाराज की तस्वीर के समक्ष दीप प्रज्लिव कर उन्है श्रध्दांजलि दी गई।
इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में आँजना चौधरी (पटेल) समाज के व्यवस्था सचिव श्री शंकर L. आँजना ने श्री सुजाराम जी महाराज की जीवनी पर विस्तृत प्रकाश डालते हुए समाज के लोगो एव युवा पीढ़ी को महाराज श्री के उपदेशो एव उनके आदर्शो को अपने जीवन में आत्मसात कर सुंस्कारित नागरिक बनकर समाज व अपने राष्ट के विकाश में सहयोग देने की बात कही।
इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में आँजना चौधरी (पटेल) समाज के अध्यक्ष श्री ताराराम चौधरी, सचिव श्री हंसाराम चौधरी, कोषाध्यक्ष श्री हरचन्दराम चौधरी , उपाध्यक्ष श्री अम्बाराम चौधरी, भाणाराम चौधरी, सह-सचिव श्री कुम्पाराम चौधरी, सांस्क्रतिक सचिव श्री नारायण भाई, व्यवस्था सचिव श्री शंकर L. आँजना, जनसंपर्क सचिव श्री लीलाराम चौधरी, श्री करसन भाई, श्री करनाराम चौधरी, माधाराम चौधरी, गमनाराम चौधरी, दिलीप चौधरी, बिंजाराम चौधरी, गोपाल पटेल, सावलाराम चौधरी, अम्बाराम चौधरी सहित सभी कार्यकारिणी सदस्यों के अलावा आँजना चौधरी (पटेल) समाज के समाज बन्धु उपस्तित थें।
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देश के शहीदों को नमन।
एक बार फिर पाकिस्तान ने पांच बेकसूर भारतीय जवानों की हत्या कर दी, वो भी हमारी सीमा में घुस कर। हद तो तब हो गई जब इस बेहद संवेदनशील मामले पर सरकार की प्रतिक्रिया विपक्ष के हंगामे के बाद आई। क्या ये उम्मीद की जा सकती है कि सीमा की रक्षा के नाम पर हमारे जवानों के शहीद होने की यह आखिरी घटना होगी?
लिंक पर क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर http://bit.ly/1cua4Jp
सैनिक की अंतिम इच्छा : एक कविता
मैं भारत माँ का प्रहरी हूँ, घायल हूँ पर तुम मत रोना,
साथी घर जाकर मत कहना, संकेतों में बतला देना
यदि हाल मेरे पिताजी पूछे तो, खाली पिंजरा दिखा देना,
इतने पर भी वह न समझे तो होनी का मर्म समझा देना
यदि हाल मेरी माता पूछे, मुरझाया फूल दिखा देना
यदि इतना कहने से न माने, जलता दीप बुझा देना
यदि हाल मेरी बहना पूछे, मस्तक तिलक मिटा देना
यदि इतना कहने से न माने, तो राखी तोड दिखा देना
यदि हाल मेरी पत्नी पूछे, मांग सिंदूर मिटा देना
यदि इतना कहने से न माने, तो चूडी तोड दिखा देना
यदि हाल मेरा बेटा पूछे तो माँ का प्यार जाता देना
इतने पर वह न समझे तो सैनिक धर्म बतला देना।
देश के शहीदों को नमन।
ख़ुशी
रुई का गद्दा बेचकर दरी खरीद ली,
ख्वाहिशो को कम किया और ख़ुशी खरीद ली !
कुछ पुरानी पतलून बेचकर चड्डी खरीद ली,
क्रिकेट को छोड़ा और कबड्डी खरीद ली !
सबने ख़रीदा सोना मेने सुई खरीद ली
सपनो को बुनने जितनी डोर खरीद ली !
मेरी एक ख्वाहिश मुझसे मेरे दोस्त ने खरीद ली,
फिर उसकी हँसी से मेने अपनी ख़ुशी खरीद ली !
इस ज़माने से सौदा कर एक ज़िन्दगी खरीद ली,
दिनों को बेचा और शामे खरीद ली !
सपनो के सिनेमा में एक सीट खरीद ली,
चुकाया पूरा बिल और पक्की रसीद ली !
रुई का गद्दा बेचकर दरी खरीद ली,
ख्वाहिशो को कम किया और ख़ुशी खरीद ली
# Rinki Chauha
गुरुदेव को शत शत नमन्
गुजरात में भाजपा की बड़ी जीत : सांसद पटेल
सांचौर। जालोर-सिरोही सांसद देवजी पटेल ने गुजरात में लोकसभा एवं विधानसभा की सीटों पर हुए उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी की जीत पर खुशी जाहिर की। सांसद पटेल ने बताया कि गुजरात में लोकसभा क्षेत्र बनासकांठा व पोरबंदर एवं चार विधानसभा की रिक्त हुई सीटों पर हुए उपचुनाव में कांग्रेस की उम्मीदों पर पानी फेरते हुए पराजय का मुंह दिखाकर भारतीय जनता पार्टी ने सभी सीटों पर बड़ी जीत हासिल की।
बनासकांठा (गुजरात) लोकसभा उपचुनाव में भाजपा के हरीभाई को विजय दिलाने पर माननीय नरेन्द्र मोदी मुख्यमंत्री गुजरात एवं माननीय सांसद देवजी पटेल ने उन सभी कार्यकर्ताओं का आभार
प्रकट किया, जिन्होंने प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से भारतीय जनता पार्टी को जीत दिलाने में सहयोग प्रदान किया। साथ ही विशेषकर जालोर सिरोही के जनप्रतिनिधियों, भाजपा के वरिष्ठ एवं सक्रिय पदाधिकारियों तथा कार्यकर्ताओं का अटूट सहयोग
रहा जिससे मेहनत रंग लाई एवं गुजरात में भारतीय
जनता पार्टी को विजय श्री हासिल हुई। जोकि आगामी राजस्थान में होने जा रहे विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के लिए शुभ संदेश हैं।
News@Shankar L. Anjana Luniyasar....
HAPPY MOTHER'S DAY
__एक कहानी माँ के नाम__
'माँ, तुम भी ना! बहुत सवाल करती हो? मैं और सुमि तुम्हें
कितनी बार तो बता चुके हैं। एक बार ठीक से समझ लिया करो ना!
पच्चीसों बार पूछ चुकी हो, रामी बुआ के बेटे
की शादी का कार्यक्रम। समय पर आपको ले चलेंगे ना!'
भुनभुनाता हुआ बेटा बोले जा रहा था, ''अभी मुझे ऑफिस में देर
हो रही है। सुमि! माँ को सारे कार्यक्रम जरा एक बार और बता देना।
अब बार-बार मत पूछना माँ! कहते हुए बेटा बैग उठाकर निकल गया।
माँ की आँखें भर आई। आजकल कोई बातयाद ही नहीं रहती, पर फिर
भी बरसों पुरानी बातें याद थीं। यहीमुन्ना दिन में
सौ मर्तबा पूछता रहता था- माँ, बताओ ना! तितली का रंग हाथ में
क्यों लग गया? क्या वो पीले रंग से होली खेल कर आई है? माँ, हम
मंदिर जाते हैं तो भगवान बोलते क्यों नहीं? भगवान सुनते कैसे हैं?
बताओ ना माँ?
आँखें भर आने से माँ की आँखें धुँधलाने लगी थी।
HAPPY MOTHER'S DAY
HAPPY MOTHER'S DAY
जब आँख खुली तो अम्मा की गोदी का एक सहारा था
उसका नन्हा-सा आँचल मुझको भूमण्डल से प्यारा था
उसके चेहरे की झलक देख चेहरा फूलों-सा खिलता हैं
उसके स्तन की एक बूंद से मुझको जीवन मिलता हैं
हाथों से बालों को नोचा, पैरों से खूब प्रहार किया
फिर भी उस माँ ने पुचकारा हमको जी भर के प्यार किया
मैं उसका राजा बेटा हूँ वो आँख का तारा कहती हैं
मैं बनूँ बुढ़ापे मेंउसका बस एक सहारा कहती हैं
उंगली को पकड़ चलाया था पढ़ने विद्यालय भेजा था
मेरी नादानी को भी निज अन्तर में सदा सहेजा था
मेरे सारे प्रश्नों का वो फौरन जवाब बन जाती हैं
मेरी राहों के काँटे चुन वो ख़ुद ग़ुलाब बन जाती हैं
माँ ही हैं जो ख़ुद भूखी रह करके हमें खिलाती थी
हमको सूखा बिस्तर देकर ख़ुद गीले में सो जाती थी
माँ ही हैं जिसने होठों को भाषा सिखलाईथी
मेरी नींदों के लिए रात भर उसने लोरी गाई थी
माँ ही हैं जिसने हर ग़लती पर डाँटा-समझाया था
बच जाऊँ बुरी नज़र से काला टीका सदा लगाया था
माँ की ममता को देख मौत भी आगे से हट जाती है
गर माँ अपमानित होती, धरती की छाती फट जाती है
घर को पूरा जीवन देकर बेचारी माँ क्या पाती है
रूखा-सूखा खा लेती है,पानी पीकर सो जाती है
जो माँ जैसी देवी घर के मंदिर में नहीं रख सकते हैं
वो लाखों पुण्य भले कर लें इंसान नहीं बन सकते हैं
माँ जिसको भी जल दे दे वो पौधा संदल बन जाता है
माँ के चरणों को छूकर पानी गंगाजल बन जाता है
माँ के आँचल ने युगों-युगों से भगवानों को पाला है
माँ के चरणों में जन्नत है गिरिजाघर औरशिवाला है
हिमगिरि जैसी ऊँचाई है, सागर जैसी गहराई है
दुनिया में जितनी ख़ुशबू है माँ के आँचल से आई है
माँ कबिरा की साखी जैसी, माँ तुलसी की चौपाई है
मीराबाई की पदावली ख़ुसरो की अमर रुबाई है
माँ आंगन की तुलसी जैसी पावन बरगद की छाया है
माँ वेद ऋचाओं की गरिमा, माँ महाकाव्यकी काया है
सारे तीरथ के पुण्य जहाँ, मैं उन चरणों में लेटा हूँ
जिनके कोई सन्तान नहीं, मैं उन माँओं का बेटा हूँ
हर घर में माँ की पूजा हो ऐसा संकल्प उठाताहूँ
मैं दुनिया की हर माँ के चरणों में ये शीश झुकाता हूँ:
समस्त आंजना(पटेल) समाज की ओर से हार्दिक बधाई
आपने जो समाज को उल्लास रुपी तोहफा दिया उसके लिए आपका हार्दिक आभार भगवान करे आप इसी तरह समाज का और अपने परिवारजनों का नाम रोशन करते रहे इसी आशा के साथ आंजना(पटेल) युवक संघ एंव आंजना(पटेल) समाज रायपुर की ओर से भी हार्दिक बधाई |
आंजना समाज सांचोर का प्रतिभा सम्मान समारोह संपन्न
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| सम्मानित होते हुए भरत चौधरी टीटोप |
श्री राजारामजी महाराज जीवन परिचय
माता-पिता के बाद राजारामजी बड़े भाई श्री रगुनाथारामजी नंगे सन्यासियों की जमात में चले गए और आप कुछ समय तक राजारामजी अपने चाचा श्री थानारामजी व कुछ समय तक अपने मामा श्री मादारामजी भूरिया, गाँव धान्धिया के पास रहने लगे | बाद में शिकारपुरा के रबारियो सांडिया, रोटी कपडे के बदले एक साल तक चराई और गाँव की गांये भी बिना हाध में लाठी लिए नंगे पाँव २ साल तक राम रटते चराई |
गाँव की गवाली छोड़ने के बाद राजारामजी ने गाँव के ठाकुर के घर १२ रोटियां प्रतिदिन व कपड़ो के बदले हाली का काम संभाल लिया | इस समय राजारामजी के होंठ केवल इश्वर के नाम रटने में ही हिला करते थे | श्री राजारामजी अपने भोजन का आधा भाग नियमित रूप से कुत्तों को डालते थे | जिसकी शिकायत ठाकुर से होने पर १२ रोटियों के स्थान पर ६ रोटिया ही देने लगे, फिर ६ मे से ३ रोटिया महाराज, कुत्तों को डालने लगे, तो ३ में से 1 रोटी ही प्रतिदिन भेजना शुरू कर दिया, लेकिन फिर भी भगवन अपने खाने का आधा हिस्सा कुत्तों को डालते थे |
इस प्रकार की ईश्वरीय भक्ति और दानशील स्वभाव से प्रभावित होकर देव भारती नाम के एक पहुंचवान बाबाजी ने एक दिन श्री राजारामजी को अपना सच्चा सेवक समझकर अपने पास बुलाया और अपनी रिद्धि-सिद्धि श्री राजारामजी को देकर उन बाबाजी ने जीवित समाधी ले ली |
उस दिन ठाकुर ने विचार किया की राजारामजी को वास्तव में एक रोटी प्रतिदिन कम ही हैं और किसी भी व्यक्ति को जीवित रहने के लिए ये काफी नहीं हैं अतः ठाकुर ने भोजन की मात्रा फिर से निश्चित करने के उद्धेश्य से उन्हें अपने घर बुलाया |
शाम के समय श्री राजाराम जी इश्वर का नाम लेकर ठाकुर के यहाँ भोजन करने गए | श्री राजारामजी ने बातों ही बातों में ७.५ किलो आटे की रोटिया आरोग ली पर आपको भूख मिटने का आभास ही नहीं हुआ | ठाकुर और उनकी की पत्नी यह देख अचरज करने लगे | उसी दिन शाम से राजारामजी हाली का काम ठाकुर को सोंपकर तालाब पर जोगमाया के मंदिर में आकर राम नाम रटने लगे | उधर गाँव के लोगो को चमत्कार का समाचार मिलने पर उनके दर्शनों के लिए ताँता बंध गया |
दुसरे दिन राजारामजी ने द्वारिका का तीर्थ करने का विचार किया और दंडवत करते हुए द्वारिका रवाना हो गए | ५ दिनों में शिकारपुरा से पारलू पहुंचे और एक पीपल के पेड़ के नीचे हजारो नर-नारियो के बिच अपना आसन जमाया और उनके बिच से एकाएक इस प्रकार से गायब हुए की किसी को पता ही नहीं लगा | श्री राजारामजी १० माह की द्वारिका तीर्थ यात्रा करके शिकारपुरा में जोगमाया के मंदिर में प्रकट हुए और अद्भुत चमत्कारी बाते करने लगे, जिन पर विश्वास कर लोग उनकी पूजा करने लग गए | राजारामजी को लोग जब अधिक परेशान करने लग गये तो ६ मास का मोन रख लिया | जब राजारामजी ने शिवरात्री के दिन मोन खोला तक लगभग ८०००० वहां उपस्थित लोगो को व्याखान दिया और अनेक चमत्कार बता
महादेवजी के उपासक होने के कारण राजारामजी ने शिकारपुरा में तालाब पर एक महादेवजी का मंदिर बनवाया, जिसकी प्रतिष्ठा करते समय अनेक भाविको व साधुओ का सत्कार करने के लिए प्रसाद के स्वरूप नाना प्रकार के पकवान बनाये जिसमे २५० क्विंटल घी खर्च किया गया | उस मंदिर के बन जाने के बाद श्री राजारामजी के बड़े भाई श्री रगुनाथारामजी जमात से पधार गये और दो साल साथ तपस्या करने के बाद श्री रगुनाथारामजी ने समाधी ले ली | बड़े भाई की समाधी के बाद राजारामजी ने अपने स्वयं के रहने के लिए एक बगेची बनाई, जिसको आजकल श्री राजारामजी आश्रम के नाम से पुकारा जाता हैं |
श्री राजारामजी महाराज ने संसारियों को अज्ञानता से ज्ञानता की ओर लाने के उद्धेश्य से बच्चों को पढाने-लिखाने पर जोर दिया | जाती, धर्म, रंग आदि भेदों को दूर करने के लिए समय-समय पर अपने व्याखान दिये | बाल विवाह, कन्या विक्रय, मृत्यु भोज जैसी बुराईयों का अंत करने का अथक प्रयत्न किया | राजारामजी ने लोगो को नशीली वस्तुओ के सेवन से दूर रहने, शोषण विहीन होकर धर्मात्न्माओ की तरह समाज में रहने का उपदेश दिया |
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